Bansgaon Sandesh
Login
Kailash Bihari
Sonbhadra३ मिनट पहले

डाला की मलिन बस्ती में फिर गरमाया भूमि विवाद, डीएम-एसपी ने किया स्थलीय निरीक्षण

डाला की मलिन बस्ती में फिर गरमाया भूमि विवाद, डीएम-एसपी ने किया स्थलीय निरीक्षण

डाला की मलिन बस्ती में फिर गरमाया भूमि विवाद, डीएम-एसपी ने किया स्थलीय निरीक्षण डाला/सोनभद्र। डाला नगर पंचायत की मलिन बस्ती एक बार फिर भूमि विवाद को लेकर चर्चा में है। शनिवार को जिलाधिकारी चर्चित गौड़ और पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा ने विवादित क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कर मौके की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों के पहुंचते ही बड़ी संख्या में बस्तीवासी हनुमान मंदिर परिसर में एकत्र हो गए और अपनी समस्याओं से प्रशासन को अवगत कराया। बस्तीवासियों ने आरोप लगाया कि एक निजी कंपनी उन पर जमीन खाली करने का दबाव बना रही है, जबकि वे पिछले तीन पीढ़ियों से इस भूमि पर निवास कर रहे हैं। उनका कहना है कि भूमि विवाद का मामला वर्तमान में हाईकोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए अंतिम न्यायिक निर्णय आने तक किसी भी प्रकार की बेदखली की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। निरीक्षण के दौरान स्थानीय प्रतिनिधियों ने भूमि अधिकार, प्रभावित परिवारों के पुनर्वास तथा उनके भविष्य का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। हालांकि जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने मौके पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की। प्रशासन की ओर से बताया गया कि निरीक्षण का उद्देश्य केवल वास्तविक स्थिति का आकलन करना और लोगों की समस्याओं को समझना है। स्थानीय प्रतिनिधि उमेश प्रसाद मेहता ने कहा कि यह लड़ाई केवल जमीन की नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों के स्थायी निवास और उनके अधिकारों की है। उन्होंने बताया कि इस भूमि को लेकर वर्षों से विवाद चला आ रहा है। पहले इस भूमि पर जेपी एसोसिएट्स दावा करती थी और अब अल्ट्राटेक कंपनी अपना दावा कर रही है। उन्होंने बताया कि मामले में न्यायालय में रेस्टोरेशन याचिकाएं भी दाखिल की गई हैं। उनका आरोप है कि कंपनी के पास पर्याप्त भूमि उपलब्ध होने के बावजूद बस्ती को हटाने का प्रयास किया जा रहा है। भाजपा जिला उपाध्यक्ष नरेंद्र प्रताप सिंह ने प्रभावित परिवारों के उचित पुनर्वास की मांग करते हुए कहा कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए किसी भी परिवार को हटाना उचित नहीं होगा। उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर कानूनी लड़ाई जारी रखने की भी बात कही। स्थानीय निवासी घनश्याम प्रसाद कुशवाहा ने बताया कि यह विवाद 338 प्रभावित परिवारों से जुड़ा है। उनके अनुसार वर्ष 2012 में कुछ लोगों को मुआवजा मिला था, लेकिन विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। बस्तीवासियों का दावा है कि क्षेत्र में लगभग 500 मकान हैं, जिनमें करीब तीन हजार लोग निवास करते हैं। उनका कहना है कि नगर पंचायत द्वारा यहां करोड़ों रुपये के विकास कार्य कराए जा चुके हैं, इसलिए यदि बस्ती हटाई जाती है तो इसका असर नगर पंचायत के स्वरूप और अस्तित्व पर भी पड़ेगा। प्रशासन का कहना है कि स्थलीय निरीक्षण के आधार पर सभी तथ्यों का परीक्षण किया जाएगा और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले में सभी की निगाहें हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई हैं।

0 likes
0 comments0 shares