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Gorakhpurलगभग २ घंटे पहले

सहजनवा में जनहित मुद्दों पर ज्ञापन देने जा रहे सामाजिक कार्यकर्ता को

सहजनवा में जनहित मुद्दों पर ज्ञापन देने जा रहे सामाजिक कार्यकर्ता को

सहजनवा में जनहित मुद्दों पर ज्ञापन देने जा रहे सामाजिक कार्यकर्ता को रात में किया गया हाउस अरेस्ट, लोकतंत्र पर उठे सवाल सहजनवा/गोरखपुर। गोरखपुर जिले के सहजनवा क्षेत्र में जनहित के मुद्दों को लेकर आंदोलन की तैयारी कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता मनीष कमाण्डों को पुलिस द्वारा देर रात हाउस अरेस्ट किए जाने का मामला चर्चा का विषय बन गया है। इस घटना के बाद क्षेत्र में लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है। जानकारी के अनुसार सहजनवा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गहासांड निवासी मनीष कमाण्डों द्वारा गीडा क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण और सहजनवा हाईवे पर कट की समस्या को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपने की तैयारी की गई थी। बताया जा रहा है कि यह ज्ञापन क्षेत्रीय जनता की समस्याओं को लेकर दिया जाना था, जिसमें प्रदूषण से प्रभावित लोगों की परेशानियों तथा हाईवे पर कट न होने से होने वाली दुर्घटनाओं और यातायात समस्याओं को प्रमुखता से उठाया जाना था। इसी बीच मनीष कमाण्डों ने आरोप लगाया कि मंगलवार देर रात करीब 12 बजे से 1 बजे के बीच पुलिस उनके घर पहुंची और उन्हें घर से बाहर निकलने से रोक दिया गया। उन्होंने इसे “हाउस अरेस्ट” बताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन और ज्ञापन देने के लोकतांत्रिक अधिकार को दबाने का प्रयास किया गया है। मनीष कमाण्डों ने कहा कि यदि जनता की समस्याओं को उठाना, प्रशासन तक आवाज पहुंचाना और शांतिपूर्ण विरोध करना अपराध माना जाएगा, तो यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि आम जनता के अधिकारों और जनहित से जुड़े मुद्दों की है। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या अब नागरिकों को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का भी अधिकार नहीं बचा है? उन्होंने इसे लोकतंत्र और मौलिक अधिकारों पर हमला बताया। घटना के बाद क्षेत्र में लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कई स्थानीय लोगों ने इसे जनआवाज को दबाने की कार्रवाई बताया, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि प्रशासन को संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए। फिलहाल इस मामले को लेकर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं क्षेत्र में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर अपनी-अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं।

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