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SHIV SHANKAR CHAUDHARY
Sultanpurलगभग १ घंटा पहले

सुल्तानपुर।बल्दीराय तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत रामपुर बबुआन के पूरे मारजनी मिश्र

सुल्तानपुर।बल्दीराय तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत रामपुर बबुआन के पूरे मारजनी मिश्र

सुल्तानपुर।बल्दीराय तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत रामपुर बबुआन के पूरे मारजनी मिश्र में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा का आयोजन मुख्य यजमान डॉ. राम सुरेश मिश्र एवं विद्यावती के साथ सह यजमान श्री राम मिश्र व गयावती, गजाधर प्रसाद मिश्र व उषा देवी, राम अचल मिश्र व ललिता मिश्रा तथा राम शंकर मिश्र व स्नेहा मिश्रा के निज आवास पर किया जा रहा है। कथा के दूसरे दिन अयोध्या धाम से पधारे कथा व्यास जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी रत्नेश प्रपन्नाचार्य जी महाराज ने अपनी ओजस्वी एवं अमृतमयी वाणी से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने राजा परीक्षित के जीवन प्रसंग का मार्मिक वर्णन करते हुए बताया कि किस प्रकार श्रापवश उन्हें सात दिन में मृत्यु का ज्ञान हुआ और उन्होंने सांसारिक मोह त्यागकर श्रीमद्भागवत कथा का आश्रय लिया।कथा व्यास ने आगे शुकदेव जी महाराज के आगमन का सुंदर प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब सच्चे मन से भक्ति की पुकार होती है, तब स्वयं भगवान के दूत मार्गदर्शन के लिए प्रकट होते हैं।उन्होंने शुकदेव जी के ज्ञान, वैराग्य और भक्ति का विस्तार से वर्णन कर श्रद्धालुओं को जीवन में धर्म और सत्संग के महत्व को समझाया। सृष्टि प्रकरण की कथा सुनाते हुए महाराज जी ने बताया कि यह संपूर्ण सृष्टि भगवान की माया का अद्भुत विस्तार है, जिसमें जीव अपने कर्मों के अनुसार जन्म-मरण के चक्र में बंधा रहता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण ही मनुष्य को इस मोह-माया से मुक्त कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। कथा के दौरान बीच-बीच में प्रस्तुत भजनों ने वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु भजनों पर झूमते और हरि नाम का संकीर्तन करते नजर आए। कथा के समापन पर भागवत भगवान एवं व्यास पीठ की विधिवत आरती उतारी गई तथा उपस्थित श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण किया गया। इस अवसर पर वासुदेव मिश्र, राम अंजोर शुक्ल, श्री निवास शुक्ल, द्वारिका नाथ दूबे, शशिकांत त्रिपाठी, ब्रम्हर्षि शुक्ल, दुर्गेश तिवारी, मुकेश तिवारी, राम केवल मिश्र, लाल बहादुर, उमेश सहित सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे. कार्यक्रम के अंत में अंकुर मिश्र, सौरभ मिश्र, हिमांशु, आदर्श, आकर्ष, संतोष, कपीश, शिवम एवं शिवांशु ने कथा श्रवण हेतु पधारे सभी श्रद्धालुओं एवं आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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