यूपी: लखनऊ की महापौर और हाईकोर्ट के बीच टकराव की नौबत, सुप्रीम

यूपी: लखनऊ की महापौर और हाईकोर्ट के बीच टकराव की नौबत, सुप्रीम कोर्ट जा सकती हैं सुषमा खर्कवाल; कहा- मैं बीमार हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के द्वारा लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल के वित्तीय अधिकार फ्रीज कर दिए थे। इस मामले में वह सुप्रीम कोर्ट जा सकती हैं। कोर्ट से निर्वाचित घोषित किए गए पार्षद ललित तिवारी को शपथ न दिलाने पर बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट ने महापौर के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए। इसके बाद भी शुक्रवार देर शाम तक महापौर की ओर से शपथ ग्रहण के संबंध में कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। ऐसे में ललित की शपथ पर अभी भी संशय बना हुआ है। चर्चा है कि इस मामले में महापौर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद शपथ ग्रहण कब होगा, इस बाबत जब महापौर सुषमा खर्कवाल से बात की गई तो उन्होंने बताया कि वह अभी अस्पताल में भर्ती हैं। जब वापस लौटेंगी तब इस बारे में बताएंगी। हालांकि, हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार जब तक ललित का शपथ ग्रहण नहीं होगा महापौर के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज रहेंगे। इस दौरान उनको शपथ दिलाने का अधिकार रहेगा। इस प्रकरण में याचिकाकर्ता ललित किशोर तिवारी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मैं अपनी ओर से क्या कहूं। कोर्ट ने खुद ही अपने आदेश में सब कुछ कह दिया है। आदेश का अनुपालन महापौर को कराना है। इस प्रकरण पर नगर आयुक्त गौरव कुमार ने कहा कि शपथ दिलाने का अधिकार महापौर को है। इस बारे में वही निर्णय लेंगी। 22 जुलाई को होगी प्रदीप की अपील पर सुनवाईइस मामले में प्रभावित फैजुल्लागंज तृतीय वार्ड के भाजपा पार्षद प्रदीप शुक्ला टिंकू का कहना है कि अपर जिला जज की कोर्ट से उनका निर्वाचन शून्य घोषित कर ललित तिवारी को पार्षद निर्वाचित किए जाने के आदेश के विरोध में उन्होंने हाईकोर्ट में प्रथम अपील कर रखी है। उस पर अभी तक निर्णय नहीं हुआ। अपील पर सुनवाई के लिए 22 जुलाई की तारीख लगी है। कोर्ट के निर्णय आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।