बड़हलगंज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का भव्य स्वागत

बडहलगंज।*नेशनल पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में गो-रक्षा और सनातन धर्म पर दिया संदेश *भगवा पहनने वाला नहीं धारण कर सकता है सांसारिक पद बडहलगंज: उपनगर बड़हलगंज स्थित नेशनल पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में रविवार को जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का भव्य आगमन हुआ। 81 दिवसीय गो-रक्षार्थ धर्म युद्ध गविष्टि यात्रा के अंतर्गत उनके आगमन को लेकर क्षेत्र में पहले से ही व्यापक तैयारियां की गई थीं। सुबह से ही कार्यक्रम स्थल पर श्रद्धालुओं, साधु-संतों, स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। पूरे परिसर को फूलों से सजाया गया था और आयोजन को सफल बनाने के लिए स्वयंसेवक लगातार व्यवस्था में जुटे रहे। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के पहुंचते ही उपस्थित लोगों ने जोरदार स्वागत किया। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उनका अभिनंदन किया गया और मंच पर उन्हें सम्मानित किया गया। पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी ने पूरे विधि विधान व वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पादुका पूजन किया।कार्यक्रम के दौरान पूरे परिसर में धार्मिक उत्साह और आस्था का माहौल बना रहा। लोगों में अपने पूज्य संत के दर्शन और उनके विचार सुनने को लेकर विशेष उत्सुकता दिखाई दी। अपने संबोधन में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक संपूर्ण व्यवस्था है, जो समाज को नैतिकता, सदाचार और एकता का मार्ग दिखाती है। उन्होंने कहा कि गौ-रक्षा भारतीय संस्कृति की आत्मा है और इसके संरक्षण के बिना हमारी परंपराएं अधूरी हैं। उन्होंने उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि वे धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए जागरूक रहें और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करें। पूज्य शंकराचार्य ने कहा कि जब हम संसार का त्याग करते हैं तब भगवा धारण करते हैं। संसार के त्याग के बाद कोई सांसारिक पद धारण नहीं कर सकते पर कुछ लोग भगवा पहन पद पर जमे हुए हैं। उनके राज में गौ और ब्राह्मण दोनों असुरक्षित हैं।उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में समाज को विभाजन से बचाकर एकजुट रखने की जरूरत है।चिल्लूपार के पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी ने अपने संबोधन में कहा कि शंकराचार्य जी का बड़हलगंज आगमन क्षेत्र के लिए अत्यंत गौरव की बात है। उनके मार्गदर्शन से समाज को नई दिशा और ऊर्जा मिलती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में एकता और भाईचारे को मजबूत करते हैं और लोगों में अपनी संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं। उन्होंने आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर पर कार्यक्रम का सफल आयोजन प्रशंसनीय है। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग शामिल हुए और शंकराचार्य जी के विचारों को ध्यानपूर्वक सुना। पूरे आयोजन में अनुशासन और व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया। अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, प्रशासनिक अधिकारियों और उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन से क्षेत्र में धार्मिक और सामाजिक चेतना का संदेश प्रसारित हुआ, जिससे लोगों में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ।