ददरी में बाढ़ बचाव कार्य पर किसानों का आक्रोश, मुआवजे की मांग को लेकर काम रोका

राप्ती किनारे कटान रोधी परियोजना पर उठे सवाल, किसानों ने लगाया मानक विहीन कार्य और जमीन हड़पने का आरोप बडहलगंज । बड़हलगंज ब्लाक क्षेत्र के ददरी गांव में राप्ती नदी के किनारे तीन करोड़ पचहत्तर लाख चौरासी हजार की लागत से बाढ़ से बचाव के लिए कराए जा रहे कटान रोधी कार्य को लेकर मंगलवार को किसानों का आक्रोश फूट पड़ा। सिंचाई विभाग बाढ़ खंड-दो द्वारा कराए जा रहे कार्य को किसानों ने मंगलवार को रोक दिया। किसानों का आरोप है कि विभाग ने शुरुआत में प्रभावित किसानों को मुआवजा देने का भरोसा दिलाया था, लेकिन अब कार्य पूरा होने की ओर है तो अधिकारी मुआवजा देने से पीछे हट रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार कार्य शुरू होने से पहले संबंधित जेई सुमित कुमार ने किसानों से जमीन संबंधी इंतखाफ और आधार कार्ड जमा कराए थे और कहा गया था कि जिन किसानों की भूमि कटान रोधी कार्य में आएगी, उन्हें नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा। किसानों का कहना है कि बीते वर्ष इसी स्थान पर जिन किसानों की जमीन प्रभावित हुई थी, उन्हें भुगतान किया गया था, लेकिन इस बार प्रभावित किसानों के साथ अनदेखी की जा रही है। -किसानों का आरोप- कटान रोकने के नाम पर खेत ही हो रहे बर्बाद गांव प्रभावित किसान योगेन्द्र शाही, ओमप्रकाश शाही,भानुप्रताप शाही, अवधेश शाही, अखिलेश शाही, डॉ श्रीकांत शाही,बिपिन शाही,विनय शाही,सत्यप्रकाश शाही,रविप्रताप शाही, करूणानिधि शाही ,अजय शाही,नीतिन शाही,रणजीत शाही,गजाधर शाही,बोरिंदर शाही,सर्वेश शाही, आदि किसानों का आरोप है कि परियोजना के अनुसार लॉन्चिंग एप्रन का निर्माण नदी के अंदर निर्धारित गहराई तक होना था, लेकिन सामग्री बचाने के चक्कर में कार्य को पीछे की ओर कर किसानों की उपजाऊ जमीन काट दी गई। इससे 20किसानों के खेत प्रभावित हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बिना मुआवजा दिए उनकी जमीन का उपयोग करना अन्याय है।इसे किसी किमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। -किसानो ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं आरोप है कि जियो बैग पिचिंग में मानकों की अनदेखी की जा रही है और बिना जियो सीट के कार्य कराया जा रहा है, जिससे बारिश और तेज बहाव में संरचना कमजोर पड़ सकती है। किसानों ने परक्यूपाइन निर्माण में भी लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि कार्य मजबूत नहीं हुआ तो भविष्य में कटान का खतरा और बढ़ जाएगा। -पहले भरोसा दिया, अब कह रहे मुआवजा नहीं मिलेगा किसानों का कहना है कि विभागीय अधिकारियों द्वारा पहले मुआवजे का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब कहा जा रहा है कि कोई भुगतान नहीं होगा। इसको लेकर किसानों भारी आक्रोश और नाराजगी है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक प्रभावित किसानों को मुआवजा नहीं मिलेगा और कार्य की गुणवत्ता की जांच नहीं होगी, तब तक कटानरोधी कार्य नहीं होने दिया जाएगा। किसानों ने आरोप लगाया कि परियोजना का उद्देश्य ग्रामीणों और तटबंध की सुरक्षा होना चाहिए, लेकिन यदि कार्य मानकों के विपरीत हुआ तो आने वाले समय में तटबंध और आसपास के गांवों पर खतरा पैदा हो सकता है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच, प्रभावित किसानों को मुआवजा और निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने की मांग की है।