ओबरा (सोनभद्र)। ओबरा ताप विद्युत परियोजना, ओबरा के संकुल में स्थित गांधी मैदान में 77 वा गणतंत्र दिवस उत्साह एवं हर्षो उल्लास का वातावरण

ओबरा (सोनभद्र)। ओबरा ताप विद्युत परियोजना, ओबरा के संकुल में स्थित गांधी मैदान में 77वाॅं गणतन्त्र दिवस भारत सरकार एवं प्रदेश सरकार द्वारा निर्गत दिशा-निर्देश का अनुपालन करते हुए, उत्साह एवं हर्षोल्लास के वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर ओबरा ताप विद्युत गृह के मुख्य महाप्रबन्धक इं0 आर0के0 अग्रवाल ने प्रातः 08.30 बजे ध्वजारोहण कर एकत्रित जनसमूह को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज हम लोग 77वां गणतन्त्र दिवस मनाने के लिये एकत्रित हुए हैं। एकत्रित जनसमूह को सम्बोधित करते हुए इं0 आर0के0 अग्रवाल ने सभी को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी। अपने भाषण को शुरू करते हुए उन्होंने बताया कि इस संविधान में जिस राज्य व्यवस्था को संजोया गया उसमें लोकतंत्र, समता, पंथनिरपेक्षता और विधि के शासन को महत्ता दी गयी तथा समाजवादी व्यवस्था की स्थापना के लिए योजनाबद्व विकास पर बल दिया गया। यह संविधान आज ही के दिन सन् 1950 को लागू हुआ तथा इसी के साथ हमारा देश लोकतांत्रिक गणराज्य बना। गणतंत्र दिवस के इस अवसर पर, हमें यह समझना चाहिए कि हमारी जिम्मेदारी यह है कि हम अपने ऊर्जा संसाधनों का सही तरीके से उपयोग करें और उन्हें सुरक्षित रखें। हमारा उद्देश्य है कि हम न केवल आज के लिए बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सस्ती और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखें। आप सभी को पता है कि ऊर्जा का महत्व बहुत अधिक है, और हमारे तापीय परियोजना का योगदान इसी संदर्भ में अत्यधिक महत्वपूर्ण है। हम यहां नवाचार और प्रौद्योगिकी के साथ काम कर रहे हैं ताकि हम न केवल ऊर्जा उत्पादन में माहिर हो, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों को ध्यान में रखकर भी देश को सबसे उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान कर सकें। आजकल के परिवेश में कई समस्याएं विद्यमान हैं जो हम सभी को गहरे विचार करने पर मजबूर कर रही हैं। इसमें प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, और वन्यजीव संरक्षण जैसे मुद्दे शामिल हैं। हमारी तापीय परियोजनाओं का संचालन करने के दौरान, हमें इन समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक कदम उठाने होंगे। विद्युत ऊर्जा के क्षेत्र में ओबरा तापीय परियोजना एक अग्रणी परियोजना रही है। ओबरा ‘ब’ परियोजना की 200मे0वा0 क्षमता की पाॅंचों इकाईयाॅ काफी पुरानी हो चुकी है फिर भी इनसे सस्ती एवं अधिक से अधिक विद्युत उत्पादन हेतु अधिकारी एवं कर्मचारी लगातार प्रयासरत् हैं। वर्ष 1977 से परिचालनरत् भारत की प्रथम 200 मे0वा0 होने का गौरव प्राप्त इकाई सं0 11 के साथ-साथ वर्तमान में ओबरा ‘ब’ परियोजना की सभी पाॅंचों इकाइयों से पूर्ण क्षमता के साथ निर्बाध विद्युत उत्पादन हो रहा है। इन इकाइयों का वर्ष 2025 में विद्युत उत्पादन विगत वर्षों की तुलना में कहीं बेहतर रहा है। ओबरा में 2×660 मे0वा0 के ओबरा ‘सी‘ का निर्माण कार्य 22 दिसम्बर 2016 को शुरू हुआ, जो कोरोना महामारी के दौरान विषम परिस्थितियों में भी चलता रहा। वर्तमान में ओबरा ‘सी‘ परियोजना की 660मे0वा0 क्षमता की दोनों इकाइयाॅं पूर्ण क्षमता पर परिचालित हैं एवं आज 2320मे0वा0 का विद्युत उत्पादन कर ओबरा परियोजना देश की अग्रणी विद्युत उत्पादन इकाइयों में सम्मिलित है। यह भी कहा कि 800मे0वा0 की दो इकाइयों की ओबरा ‘डी’ तापीय परियोजना का कार्य अब प्रारम्भिक चरण में है। यह परियोजना न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों में वृद्धि करेगी, बल्कि उभरती ऊर्जा आवश्यकताओं को संतुलित करने में भी सहायक सिद्ध होगी। इस महत्त्वपूर्ण कार्य को सफलता पूर्वक पूर्ण करने के लिए स्थानीय जनता का समर्थन, जनभागीदारी, प्रशासनिक सहयोग और सामाजिक समन्वय अत्यन्त आवश्यक हैं। मुख्य महाप्रबन्धक द्वारा प्रत्येक नागरिक से अपील की गयी कि वे इस राष्ट्रीय महत्व की परियोजना में सकारात्मक भूमिका निभाएँ ताकि ओबरा और उत्तर प्रदेश का नाम देश के विकास मानचित्र पर और भी ऊँचा उठ सके। विद्युत ऊर्जा के क्षेत्र में ओबरा तापीय परियोजना सदैव एक अग्रणी परियोजना रही है इसलिए अधिकाधिक विद्युत उत्पादन की जिम्मेदारी भी हमारे ऊपर है। उपरोक्त वर्णित इकाईयों के परिचालनरत हो जाने के उपरान्त ओबरा परियोजना पुनः देश में सर्वाधिक विद्युत उत्पादन करने वाली इकाइयों में से एक हो जायेगी। ओबरा तापीय परियोजना के अधिकारियों एवं कर्मचारियों का समर्पण, कुशलता और विशेषता पर हमें गर्व है। इस वर्ष ऐतिहासिक रूप से समारोह में विभिन्न विद्यालयों के लगभग 500 छात्र-छात्राओं की सहभागिता इस कार्यक्रम में रही, जिससे यह आयोजन और भी अधिक भव्य, अनुशासित एवं गरिमामयी बन सका है। विद्यालयों के शिक्षकों, समन्वयकों तथा विद्यार्थियों की यह सक्रिय भागीदारी न केवल राष्ट्रभक्ति की भावना को सुदृढ़ करती है, बल्कि सामाजिक सहभागिता का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी प्रस्तुत करती है। समारोह में मुख्य अभियन्तागण इं0 एस0एन0 मिश्रा, इं0 एस0के0 सिंघल, इं0 दिवाकर स्वरूप, सी0आई0एस0एफ0 कमाण्डेट श्री एस0के0 सिंह तथा अधीक्षण अभियन्तागण इं0 मणि शंकर राय, इं0 डी0 के0 सिंह, इं0 अब्दुल निशात, इं0 सुधान्शु यादव, इं0 बिनोद पाण्डेय, इं0 अजय उपाध्याय, इं0 चन्द्रमा प्रसाद एवं उप महाप्रबन्धक (लेखा) श्री अखिलेश त्रिपाठी, सी0एम0ओ0 डा0 पी0के0 सिंह, अधिशासी अभियन्ता इं0 सदानन्द यादव तथा अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी यथा श्री शेष नाथ यादव, श्री धनंजय शुक्ला, श्री अरूण कुमार सिंह आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन श्री अनुराग मिश्र द्वारा किया गया।