त्रपित बंसल: IIT कानपुर से AI की दुनिया के शिखर तक, OpenAI

त्रपित बंसल: IIT कानपुर से AI की दुनिया के शिखर तक, OpenAI के o1 मॉडल के आर्किटेक्ट को Meta ने दिया 800 करोड़ का पैकेज *नई दिल्ली।* ओपनएआई के चर्चित o1 रीजनिंग मॉडल की नींव रखने वाले भारतीय मूल के रिसर्चर त्रपित बंसल ने AI को सिर्फ तेज नहीं, बल्कि जवाब देने से पहले 'सोचना' सिखाया। उनकी इसी सोच ने उन्हें AI की दुनिया की सबसे बड़ी प्रयोगशाला तक पहुंचा दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक Meta ने उन्हें अपनी महत्वाकांक्षी 'सुपरइंटेलिजेंस' टीम के लिए करीब 800 करोड़ रुपये के पैकेज पर चुना है। 2007 में IIT कानपुर से शुरू हुआ सफर साल 2007। IIT कानपुर का कैंपस। एक युवा इस प्रतिष्ठित संस्थान में दाखिला लेता है। 2012 में डिग्री पूरी करने के बाद वह बंगलूरू के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) पहुंचा, जहां मशीन लर्निंग लैब में रिसर्च असिस्टेंट के तौर पर उसने AI की दुनिया में पहला कदम रखा। यह वह दौर था जब दुनिया AI से पूरी तरह वाकिफ भी नहीं थी, लेकिन त्रपित उन लोगों में से थे जो AI के भविष्य की नींव रख रहे थे। सीखने की इसी ललक ने उन्हें अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स एमहर्स्ट पहुंचाया, जहां उन्होंने कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स और पीएचडी की। यूनिवर्सिटी रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने 2021 में पीएचडी पूरी की। भीड़ से अलग राह चुनी अक्सर इंजीनियरिंग के छात्र कंप्यूटर साइंस को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन त्रपित ने IIT कानपुर में गणित और सांख्यिकी जैसे विषय चुने। 2007 से 2012 के बीच उन्होंने इन विषयों में पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड डिग्री पूरी की। यही मजबूत गणितीय आधार आगे चलकर उनके AI और मशीन लर्निंग रिसर्च में काम आया। उनकी पीएचडी थीसिस में मशीन लर्निंग और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) प्रमुख रहे। उन्होंने शोध किया कि AI को बहुत ज्यादा उदाहरण दिए बिना भी नई चीजें कैसे सिखाई जा सकती हैं। उनकी थीसिस में उनके तरीकों की तुलना GPT-3 जैसे मॉडलों से भी की गई थी। इंटरनेशनल मंचों पर शोध और कंसल्टिंग से शुरुआत एकेडमिक रिसर्च में जाने से पहले उन्होंने 2012-2013 में गुरुग्राम में एक्सेंचर में एनालिस्ट के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने फेसबुक, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और ओपनएआई जैसी दिग्गज टेक कंपनियों में रिसर्च इंटर्नशिप की। अपनी पीएचडी और रिसर्च करियर के दौरान उन्होंने दुनिया के प्रतिष्ठित मंचों - इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन लर्निंग रिप्रेजेंटेशन (ICLR), एनुअल मीटिंग ऑफ द एसोसिएशन फॉर कंप्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स (ACL) और कॉन्फ्रेंस ऑन एम्पिरिकल मेथड्स इन नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (EMNLP) पर शोध पत्र प्रस्तुत किए। उनका शोध 'इमर्जेंट कॉम्प्लेक्सिटी वाया मल्टी-एजेंट कॉम्पिटिशन' AI एजेंटों के जटिल व्यवहार को समझने में मील का पत्थर माना जाता है। उनके एक शोध पत्र ने ICLR-2018 में बेस्ट पेपर का पुरस्कार भी जीता। OpenAI के o1 मॉडल के पीछे का दिमाग त्रपित ने जनवरी 2022 में ओपनएआई को बतौर रिसर्चर जॉइन किया। उन्होंने ओपनएआई के बहुचर्चित o1 रीजनिंग मॉडल, जिसे प्रोजेक्ट स्ट्रॉबेरी/Q* के नाम से भी जाना गया, के विकास में बुनियादी योगदान दिया। उन्होंने केवल बड़े मॉडल प्रशिक्षित करने पर नहीं, बल्कि इस बात पर शोध किया कि AI मॉडल जवाब देने से पहले खुद सोचने में अधिक समय कैसे खर्च कर सकता है। यही विचार o1 की सफलता की रीढ़ बना। इस दौरान उन्होंने रीइन्फोर्समेंट लर्निंग और AI रीजनिंग पर कंपनी के पूर्व चीफ साइंटिस्ट इल्या सुत्सकेवर के साथ सीधे काम किया। अब वह Meta में लुकास बायर, अलेक्सांद्र कोलेस्निकोव और शियाओहुआ झाई जैसे वैश्विक विजन और डीप लर्निंग विशेषज्ञों के साथ अगली पीढ़ी के फ्रंटियर मॉडल्स पर काम कर रहे हैं। युवाओं के लिए सीख त्रपित की कहानी बताती है कि शॉर्टकट भले जल्दी आगे ले जाए, लेकिन गहरी समझ, लगातार सीखना और वर्षों की मेहनत ही आपको वहां पहुंचाती है, जहां पहुंचना दूसरों को असंभव लगता है। *1.* सफलता के पीछे न भागें, बल्कि करियर में हर पड़ाव से सीखते हुए आगे बढ़ें। *2.* विशेषज्ञता केवल अनुभव से नहीं, बल्कि किसी विषय को गहराई से समझने से आती है। *3.* सवाल पूछने और नई चीजें खोजने की आदत विकसित करें।