ईमानदारी की मिसाल: साइकिल से गांव-गांव पहुंचकर सेवा दे रहे लेखपाल अनिल

ईमानदारी की मिसाल: साइकिल से गांव-गांव पहुंचकर सेवा दे रहे लेखपाल अनिल कुमार गोस्वामी पूर्व सैनिक ने सादगी, निष्ठा और कर्तव्यपरायणता से जीता लोगों का दिल, विश्व साइकिल दिवस पर दिया स्वास्थ्य का संदेश जखनियां (गाजीपुर)। आज के दौर में जहां अधिकांश लोग सुविधाजनक और विलासितापूर्ण जीवनशैली को प्राथमिकता दे रहे हैं, वहीं गाजीपुर जनपद की जखनियां तहसील में कार्यरत लेखपाल अनिल कुमार गोस्वामी अपनी सादगी, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से एक अलग पहचान बना रहे हैं। उनकी कार्यशैली क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग उन्हें एक आदर्श सरकारी कर्मचारी के रूप में देख रहे हैं।वर्तमान में मटुकपुर ग्राम सभा में लेखपाल पद पर कार्यरत अनिल कुमार गोस्वामी वर्ष 2016 से राजस्व विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इससे पूर्व वह भारतीय सेना में देश सेवा का दायित्व निभा चुके हैं। देश की सीमाओं की रक्षा करने के बाद अब वह ग्रामीण क्षेत्रों में जनता की सेवा को अपना कर्तव्य मानते हैं।सबसे खास बात यह है कि वर्ष 2016 से लेकर आज तक उन्होंने अपने कार्यक्षेत्र में आने-जाने के लिए साइकिल को ही अपना साधन बनाया हुआ है। चाहे भीषण गर्मी हो, कड़ाके की ठंड या बरसात, अनिल गोस्वामी प्रतिदिन साइकिल से ही तहसील से निकलकर अपने क्षेत्र में पहुंचते हैं और राजस्व संबंधी मामलों का निस्तारण पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता के साथ करते हैं।तपती धूप में साइकिल के पीछे अपना बैग बांधे जब वह गांवों की ओर निकलते हैं तो लोगों के बीच उनकी सादगी और समर्पण की चर्चा स्वतः होने लगती है। आमजन का कहना है कि वर्तमान समय में ऐसे कर्मचारी कम ही देखने को मिलते हैं, जो बिना किसी दिखावे के पूरी निष्ठा के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हों।मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद के निवासी अनिल कुमार गोस्वामी ने बातचीत के दौरान कहा कि सेना में रहते हुए उन्होंने देश सेवा का अवसर प्राप्त किया और अब प्रशासनिक व्यवस्था के माध्यम से जनता की सेवा करने का सौभाग्य मिला है। उनका प्रयास रहता है कि प्रत्येक व्यक्ति की समस्या का समाधान पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ किया जाए।जब उनसे पूछा गया कि अधिकांश कर्मचारी दोपहिया या चारपहिया वाहनों का उपयोग करते हैं, लेकिन वह साइकिल से ही क्यों चलते हैं, तो उन्होंने बड़ी सहजता और विनम्रता के साथ उत्तर दिया कि उनकी आय से परिवार का भरण-पोषण सुचारू रूप से हो जाता है और वह अपनी क्षमता से अधिक खर्च नहीं करना चाहते। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वह किसी भी व्यक्ति से अनावश्यक धन लेना उचित नहीं समझते और अपनी ईमानदारी से कोई समझौता नहीं करना चाहते।विश्व साइकिल दिवस के अवसर पर उन्होंने लोगों को संदेश देते हुए कहा कि साइकिल चलाना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक है। इससे शरीर स्वस्थ रहता है, पर्यावरण सुरक्षित रहता है और अनावश्यक खर्चों में भी कमी आती है। उन्होंने युवाओं से अधिक से अधिक साइकिल चलाने की अपील की।अनिल कुमार गोस्वामी ने अपनी एक व्यक्तिगत इच्छा भी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वह मूल रूप से मेरठ जनपद के निवासी हैं और यदि शासन-प्रशासन उनकी तैनाती उनके गृह जनपद अथवा आसपास के क्षेत्र में कर दे तो उन्हें वहां के गरीब, शोषित और वंचित लोगों की सेवा करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने इसे अपनी दिली इच्छा बताया।क्षेत्र में अनिल कुमार गोस्वामी की सादगी, ईमानदारी और साइकिल से नियमित आवागमन की चर्चा आमजन के बीच लगातार हो रही है। लोग उन्हें सरकारी सेवा में निष्ठा, ईमानदारी और सादगी का जीवंत उदाहरण मान रहे हैं। ऐसे समय में जब अक्सर सरकारी कर्मचारियों की कार्यशैली पर सवाल उठते हैं, अनिल कुमार गोस्वामी अपने व्यवहार और कार्यों से एक सकारात्मक संदेश देने का कार्य कर रहे हैं।