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Balram Singh
Fatehpur४३ मिनट पहले

कोर्रा कनक में बिना टेंडर और बिना इस्टीमेट के नाला निर्माण पर बवाल!

कोर्रा कनक में बिना टेंडर और बिना इस्टीमेट के नाला निर्माण पर बवाल!

कोर्रा कनक में बिना टेंडर और बिना इस्टीमेट के नाला निर्माण पर बवाल! प्रधान बोले- इस्टीमेट नहीं बना, सचिव ने माना शिकायत मिली, ठेकेदार ने भी स्वीकारा मानकहीन ईंट लगाने की बात अब कौन जेई अपनी कलम की ताकत दिखाकर रातोंरात इस्टीमेट बनाकर कागज दुरुस्त करेगा. आख़िरकार ग्राम पंचायत कोर्रा में प्रशासक कार्यकाल में कैसे प्रधान, सचिव, रोजगार सेवक और ठेकेदार ने जिलाधिकारी के अनुमोदन के बिना काम करवाया ग्रामीणों का आरोप- प्रधान, सचिव, रोजगार सेवक और ठेकेदार की मिलीभगत से सरकारी धन का खेल, डीएम से जांच की मांग फतेहपुर अशोथर विकासखंड के ग्राम पंचायत कोर्रा कनक में हो रहे नाला निर्माण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ननकवा सिंह के घर से मुख्य मार्ग तक कराया जा रहा नाला निर्माण बिना टेंडर और बिना स्वीकृत इस्टीमेट के कराया जा रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिम्मेदारों के बयानों में भी विरोधाभास सामने आ रहा है, जिससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा गया है।ग्रामीणों की शिकायत पर मौके पर पहुंची मीडिया टीम ने निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। नाला निर्माण में तीन नंबर ईंट का प्रयोग किया जा रहा है और मसाले की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में पहले भी कई कार्य बिना मानक और बिना पारदर्शिता के कराए गए हैं, जिनका विरोध करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई।जब इस संबंध में ग्राम प्रधान से बात की गई तो उन्होंने स्वीकार किया कि नाला निर्माण का कार्य कराया जा रहा है, लेकिन उन्होंने कहा कि अभी तक कार्य का इस्टीमेट नहीं बना है। प्रधान ने यह भी कहा कि टेंडर की प्रक्रिया सचिव अथवा ठेकेदार की ओर से कराई गई होगी। प्रधान के इस बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया कि जब इस्टीमेट ही तैयार नहीं हुआ तो निर्माण कार्य किस आधार पर शुरू हुआ और इसके लिए धनराशि किस प्रक्रिया के तहत जारी की गई। मामले में ग्राम सचिव आशुतोष सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें शिकायत मिली है कि निर्माण में तीन नंबर ईंट का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ठेकेदार को अवगत करा दिया गया है और यदि शिकायत सही पाई जाती है तो ईंट हटाकर मानक के अनुरूप कार्य कराया जाएगा।कुछ देर बाद ठेकेदार आशू सिंह का भी फोन आया। उन्होंने कहा कि सचिव का फोन आया था वह संबंधित ईंट हटवा देंगे और दूसरी ईंट मंगवाकर लगवाई जाएगी। ठेकेदार ने यह भी बताया कि ईंट रोजगार सेवक की ओर से भेजी गई थी, जिसके कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। हालांकि इस बयान के बाद रोजगार सेवक की भूमिका को लेकर भी नए सवाल खड़े हो गए हैं।जब इस पूरे मामले को लेकर खंड विकास अधिकारी अशोथर से जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मनरेगा से कोई कार्य नहीं कराया जा रहा है और यदि बिना निर्धारित प्रक्रिया, बिना स्वीकृति अथवा बिना तकनीकी अनुमोदन के कोई निर्माण कार्य कराया जा रहा है तो उसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम प्रधान का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या संबंधित निर्माण कार्य के लिए सक्षम अधिकारियों से आवश्यक अनुमति प्राप्त की गई है या नहीं। यदि अनुमति नहीं ली गई तो निर्माण कार्य किसके आदेश पर कराया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने रोजगार सेवक की कार्यशैली पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में कई योजनाओं के संचालन और सामग्री आपूर्ति में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरकारी योजनाओं में प्रयुक्त सामग्री को लेकर भी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित पक्षों का कहना है कि वे किसी भी जांच में सहयोग करने को तैयार हैं।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो सोमवार को जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य की तकनीकी जांच, वित्तीय जांच और स्वीकृति से जुड़े अभिलेखों की गहन जांच कराई जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आखिर बिना टेंडर और बिना इस्टीमेट के निर्माण कार्य कैसे शुरू हुआ। अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय यह है कि क्या जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराएंगे और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी कागजों और फाइलों तक सीमित रह जाएगा। कोर्रा कनक का यह नाला निर्माण अब केवल एक विकास कार्य नहीं, बल्कि सरकारी धन के उपयोग, पारदर्शिता और जवाबदेही पर उठे बड़े सवालों का केंद्र बन गया है।

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