वाराणसी रूट की प्राइवेट बसों में यात्रियों से ठगी का खेल?

वाराणसी रूट की प्राइवेट बसों में यात्रियों से ठगी का खेल? टिकट के नाम पर कथित गड़बड़ी का आरोप, पत्रकार के साथ हुई घटना के बाद जांच की उठी मांग सोनभद्र/ओबरा। ओबरा से वाराणसी जाने वाली सुबह 6:00 बजे की एक प्राइवेट बस में यात्रियों के साथ कथित रूप से ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि बस का कंडक्टर टिकट काटते समय यात्रियों से पूरे पैसे लेकर टिकट पर बकाया राशि अलग तरीके से अंकित कर देता है, जिससे यात्री भ्रमित हो जाते हैं। गंतव्य पर पहुंचने की जल्दबाजी का फायदा उठाकर कथित तौर पर कम पैसे वापस किए जाते हैं। इस बार इस कथित धोखाधड़ी का शिकार पत्रकार रामआश्रय बिंद भी हुए। उन्होंने बताया कि ओबरा से रावटसगंज जाने के लिए उन्होंने कंडक्टर को ₹200 का नोट दिया। रावटसगंज का किराया ₹50 था। कंडक्टर ने टिकट पर ऐसा अंकन किया कि उन्हें उस समय यह समझ नहीं आया कि यह बकाया राशि का विवरण है या कुछ और। बाद में रावटसगंज पहुंचने पर कंडक्टर ने उन्हें केवल ₹50 वापस दिए और बस आगे बढ़ा दी। पत्रकार रामआश्रय बिंद के अनुसार, टिकट को ध्यान से देखने पर पता चला कि उनके ₹150 वापस होने थे, लेकिन उन्हें केवल ₹50 ही दिए गए। यानी कथित रूप से ₹100 कम लौटाए गए। उन्होंने बताया कि उन्हें कंडक्टर के लिखने का तरीका उस समय समझ नहीं आया, इसलिए उन्होंने टिकट को सबूत के तौर पर सुरक्षित रख लिया और उसे फेंका नहीं। रामआश्रय बिंद का कहना है कि यदि एक पत्रकार के साथ ऐसी घटना हो सकती है तो आम यात्रियों, बुजुर्गों, महिलाओं और कम पढ़े-लिखे लोगों के साथ प्रतिदिन इस प्रकार की कथित ठगी होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्राइवेट बसों में इस तरह का तरीका अपनाकर यात्रियों को भ्रमित किया जाता है। उन्होंने जिला प्रशासन, संभागीय परिवहन विभाग (आरटीओ) और पुलिस प्रशासन से मांग की है कि संबंधित बस, चालक और कंडक्टर की निष्पक्ष जांच कराई जाए। टिकट रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज (यदि उपलब्ध हो) तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की जांच कर दोषी पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। पत्रकार रामआश्रय बिंद ने यात्रियों से भी अपील की है कि प्राइवेट बसों में यात्रा करते समय टिकट पर लिखी गई प्रत्येक जानकारी ध्यान से पढ़ें और अपना पूरा बकाया तुरंत प्राप्त कर लें। उन्होंने कहा कि जहां तक संभव हो, सरकारी रोडवेज बसों से यात्रा करें, क्योंकि वहां टिकट जारी होने के तुरंत बाद शेष राशि वापस करने की व्यवस्था अधिक पारदर्शी रहती है। (नोट: यह समाचार शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। संबंधित बस संचालक या कंडक्टर का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)