सुल्तानपुर। मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी व्यवस्था सवालों के घेरे में है। मोर्चरी

सुल्तानपुर। मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी व्यवस्था सवालों के घेरे में है। मोर्चरी हाउस में शवों को सुरक्षित रखने के लिए केवल दो डीप फ्रीजर उपलब्ध हैं। ऐसे में किसी बड़े हादसे के दौरान एक साथ कई शव आने पर मोर्चरी की क्षमता तुरंत जवाब दे देती है और शवों को फ्रीजर के बजाय कमरे में ही रखना पड़ता है।शनिवार रात शंभूगंज बाजार में 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन टूटने से दो लोगों की मौत के बाद भी यही स्थिति देखने को मिली। जानकारी के अनुसार, मोर्चरी के एक डीप फ्रीजर में पहले से ही एक लावारिस शव रखा हुआ था। ऐसे में दूसरा फ्रीजर केवल एक मृतक के लिए ही उपलब्ध था, जबकि दूसरे मृतक के शव को मजबूरन मोर्चरी कक्ष में ही रखना पड़ा। यह स्थिति मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं और आपदा से निपटने की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि किसी सड़क हादसे, प्राकृतिक आपदा या अन्य बड़ी दुर्घटना में एक साथ कई लोगों की मौत हो जाए, तो वर्तमान व्यवस्था पूरी तरह नाकाफी साबित हो सकती है। अब जरूरत इस बात की है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग मोर्चरी की क्षमता बढ़ाने के लिए तत्काल कदम उठाए। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आबादी और लगातार बढ़ रही दुर्घटनाओं को देखते हुए मेडिकल कॉलेज में शवों के सुरक्षित संरक्षण के लिए डीप फ्रीजर की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में मृतकों के शवों को सम्मानजनक और सुरक्षित तरीके से रखा जा सके।