कागज़ों में दौड़ रहा विकास, गांवों में दिख रही बदहाली की तस्वीर!
कागज़ों में दौड़ रहा विकास, गांवों में दिख रही बदहाली की तस्वीर! प्रमुख बुनियादी सुविधाओं को लेकर जिसमें शौचालय, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और सफाई व्यवस्था पर उठ रहे गंभीर सरकारी फाइलों में विकास की चमचमाती तस्वीरे दिखाई जा रही है, लेकिन देवरिया के ग्रामीण इलाकों में जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। की टीम ने रामपुर कारखाना, बैतालपुर और गौरी बाजार विकासखंड के दर्जनों गांवों का स्थलीय निरीक्षण किया तो विकास कार्यों की वास्तविकता और सरकारी दावों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला। ग्रामीण क्षेत्रों में करोड़ों रुपये खर्च कर शौचालय निर्माण और स्वच्छता अभियान चलाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन कई गांवों में शौचालय अधूरे पड़े हैं या फिर उपयोग के योग्य नहीं हैं। कुछ स्थानों पर शौचालयों में पानी की व्यवस्था तक नहीं है, जिससे लोग आज भी खुले में शौच करने को मजबूर हैं। पेयजल व्यवस्था की स्थिति भी चिंताजनक है। भीषण गर्मी के बीच कई हैंडपंप खराब पड़े हैं, जबकि जल जीवन मिशन और अन्य योजनाओं के तहत शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के दावे किए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई योजनाएं केवल कागजों में संचालित हो रही हैं और उन्हें शुद्ध पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर भी संतोषजनक नहीं दिखी। कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उपकेंद्रों पर डॉक्टरों की अनुपस्थिति, दवाओं की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण मरीजों को जिला अस्पताल अथवा निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। शिक्षा व्यवस्था में भी कई खामियां सामने आईं। कई विद्यालयों में संसाधनों की कमी, जर्जर भवन, साफ-सफाई की समस्या और मूलभूत सुविधाओं का अभाव देखने को मिला। अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा के स्तर में सुधार के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अभी भी सुधार की मांग कर रही है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत गांवों को स्वच्छ बनाने के दावों के बीच कई स्थानों पर कूड़े के ढेर, बजबजाती नालियां और गंदगी का साम्राज्य देखने को मिला। कूड़ेदान केंद्र बने होने के बावजूद नियमित सफाई नहीं हो रही है। कई ग्रामीणों ने सफाई कर्मियों की कमी और अधिकारियों की उदासीनता पर सवाल उठाए। ग्रामीणों का कहना है कि विकास योजनाओं का वास्तविक लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है। उनका आरोप है कि कई परियोजनाएं केवल रिपोर्टों और सरकारी फाइलों तक सीमित होकर रह गई हैं, जबकि धरातल पर समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर विकास के नाम पर खर्च होने वाला बजट कहां जा रहा है? क्या जिम्मेदार अधिकारी इन समस्याओं का संज्ञान लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाल व्यवस्था को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाएंगे, या फिर विकास की कहानी सरकारी कागजों और बैठकों तक ही सीमित रह जाएगी? नेक्स्ट अपडेट की जमीनी पड़ताल जारी है। बताते चलें कि बैतालपुर ब्लाक मगरेचा ग्राम सभा में अमृत सरोवर योजना के अंतर्गत कागज में पोखर का निर्माण किया गया जबकि धरातल पर यस का टास्क दिख रहा है गौरी बाजार विकासखंड के ग्राम कटोरा कूड़ा केंद्र पूरी तरीके से ध्वस्त दिख रहा है हॉस्पिटल के फाटक पूरे टूटे हुए हैं सरकारी भवन में गोबर मिट्टी डालकर कब्जा किया गया है ग्रामीणों में सीधे ग्राम प्रधान पर विकास कार्यों की अंतरिक्ष एवं सरकारी धन का दुरुपयोग करने का गंभीर आरोप लगाया वही रामपुर कारखाना क्षेत्र के