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Rajkumar Raj
Gorakhpur८ मिनट पहले

बाढ़ के बढ़ते खतरे के बीच डीएम ने संभाला मोर्चा, नाव से

बाढ़ के बढ़ते खतरे के बीच डीएम ने संभाला मोर्चा, नाव से

बाढ़ के बढ़ते खतरे के बीच डीएम ने संभाला मोर्चा, नाव से गांव पहुंचे दीपक मीणा 39 प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण, 58 नाव और 15 मोटर बोट सक्रिय; ग्रामीणों से सीधे संवाद कर जानी समस्याएं गोरखपुर। राप्ती, रोहिन, धाधरा और सरयू नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच जिला प्रशासन ने बाढ़ से निपटने के लिए कमर कस ली है। संभावित बाढ़ और जलभराव की स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी दीपक मीणा ने गुरुवार को विभिन्न बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। डीएम खुद नाव से गांवों तक पहुंचे और ग्रामीणों से सीधे वार्ता कर जलस्तर, आवागमन और अन्य समस्याओं की जानकारी ली। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को राहत एवं बचाव व्यवस्था को लेकर सख्त निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने अधिकारियों से कहा कि बाढ़ की स्थिति में सबसे पहली प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा होनी चाहिए। किसी भी प्रभावित गांव में ग्रामीणों को आवागमन, भोजन, स्वास्थ्य अथवा सुरक्षा संबंधी परेशानी नहीं होनी चाहिए। जलस्तर में वृद्धि की लगातार निगरानी करते हुए संवेदनशील गांवों में पहले से ही सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए। प्रशासन के अनुसार वर्तमान में जनपद के 39 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन और राहत-बचाव कार्यों के लिए 58 नावें तथा 15 मोटर बोट सक्रिय की गई हैं। डीएम ने नावों और मोटर बोट की उपलब्धता एवं संचालन की स्थिति की जानकारी लेते हुए निर्देश दिया कि जिस क्षेत्र में आवश्यकता हो, वहां बिना देरी के संसाधन पहुंचाए जाएं। निरीक्षण के दौरान डीएम दीपक मीणा नाव से प्रभावित गांवों में पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की। उन्होंने ग्रामीणों से जलभराव की स्थिति, आवागमन की समस्या तथा प्रशासन से मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों को मौके पर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। विशेष रूप से बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने को कहा गया। डीएम ने कहा कि बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार है। नदी के जलस्तर में होने वाले प्रत्येक बदलाव पर नजर रखी जा रही है। संवेदनशील क्षेत्रों में राजस्व, सिंचाई, पुलिस, स्वास्थ्य सहित संबंधित विभागों की टीमें सक्रिय रहें और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आपसी समन्वय के साथ काम किया जाए। किसी भी सूचना को नजरअंदाज न किया जाए और जलस्तर बढ़ने अथवा किसी नए क्षेत्र में जलभराव की स्थिति उत्पन्न होने पर तत्काल उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाए। उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है, इसलिए सूचना मिलने के बाद राहत दल और संसाधन मौके पर पहुंचने में देरी नहीं होनी चाहिए। जिलाधिकारी ने नावों की तैनाती और उनकी स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रभावित गांवों में लोगों के आवागमन के लिए नावों की पर्याप्त व्यवस्था बनी रहनी चाहिए। वहीं, मोटर बोट को आपात स्थिति में तत्काल मौके पर भेजने के लिए तैयार रखा जाए। प्रशासन की ओर से राप्ती, रोहिन, धाधरा और सरयू नदियों के तटवर्ती क्षेत्रों पर लगातार निगरानी की जा रही है। नए क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने की स्थिति में तत्काल वहां राहत एवं बचाव के संसाधन उपलब्ध कराने की तैयारी है। अधिकारियों को लगातार क्षेत्र में भ्रमण कर ग्रामीणों से संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। डीएम दीपक मीणा ने स्पष्ट किया कि बाढ़ प्रभावित लोगों की सुरक्षा में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन की पूरी मशीनरी संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए सक्रिय है। जहां नाव की जरूरत है, वहां नाव उपलब्ध कराई जा रही है और मोटर बोट को भी संवेदनशील क्षेत्रों के लिए तैयार रखा गया है। निरीक्षण के दौरान एडीएम वित्त एवं राजस्व जय प्रकाश सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

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