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Gorakhpur१५ दिन पहले

बेलघाट की पावन भूमि पर भक्ति, संस्कार और इतिहास का विराट संगम

बेलघाट की पावन भूमि पर भक्ति, संस्कार और इतिहास का विराट संगम

बेलघाट की पावन भूमि पर भक्ति, संस्कार और इतिहास का विराट संगम महाकाल महादेव, प्रभु श्रीराम और बजरंगबली की कृपा से रचा गया नया धार्मिक अध्याय बेलघाट बांसगांव संदेश बेलघाट की पावन भूमि एक बार फिर सनातन आस्था, भक्ति और संस्कार की साक्षी बनने जा रही है। महाकाल महादेव की अनन्य भक्ति, प्रभु श्रीराम की कृपा और महाबली बजरंगबली के आशीर्वाद से बेलघाट के लाल, रणवीर शाही ‘चंचल शाही ने ऐसा धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास रच दिया है, जिसकी चर्चा आज जिले से लेकर पूरे प्रदेश में हो रही है। यह केवल एक मंदिर निर्माण नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, धार्मिक चेतना और सामाजिक एकता का विराट प्रतीक बन चुका है। बेलघाट में न केवल भव्य हनुमान मंदिर, बल्कि महाकाल महादेव मंदिर और प्रभु श्रीराम मंदिर का निर्माण कर श्रद्धा का ऐसा केंद्र विकसित किया गया है, जो क्षेत्र की पहचान बनता जा रहा है। श्री शाही जी द्वारा तैयार की गई धार्मिक रूपरेखा इतनी सशक्त और भावपूर्ण है कि आने वाले दिनों में बेलघाट आस्था का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। इसी क्रम में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा का पावन आयोजन प्रस्तावित है, जिसकी जिम्मेदारी श्री शांतनु जी महाराजजी के प्रभार में संपन्न होगी। कार्यक्रमों की भव्य रूपरेखा धार्मिक आयोजनों की शुरुआत 11 फरवरी को होगी, जब 1100 माता-बहनें एवं छात्राएं भव्य कलश यात्रा में सहभागिता करेंगी। यह यात्रा न केवल धार्मिक उत्साह का प्रतीक होगी, बल्कि नारी शक्ति और संस्कारों की जीवंत झलक भी प्रस्तुत करेगी। इसके पश्चात 12 फरवरी से धार्मिक कथा का शुभारंभ होगा, जिसमें श्रद्धालु प्रभु श्रीराम एवं महाकाल महादेव की लीलाओं का श्रवण करेंगे। कार्यक्रम का समापन 18 फरवरी को प्राण-प्रतिष्ठा एवं विशाल भंडारे के साथ होगा, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। जिले से प्रदेश तक चर्चा का विषय महाकाल महादेव की भक्ति, प्रभु श्री राम कीशरण में रहने वाले क्षेत्र के श्रद्धालुओं की आस्था और चंचल शाही के अथक प्रयासों से यह आयोजन एक धार्मिक महासंगम का रूप ले चुका है। बेलघाट की पावन भूमि पर यह सिद्ध हो चुका है कि जब भक्ति, संकल्प और सेवा एक साथ आते हैं, तो इतिहास स्वयं रचा जाता है। आज बेलघाट न केवल एक गांव या क्षेत्र नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और धार्मिक चेतना का केंद्र बनकर जिले से प्रदेश तक चर्चा का विषय बना हुआ है।

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