डाला नंगर पंचायत की लापरवाही ने ली एक जान, ठंड से मौत के बाद भी जिम्मेदार बेखबर

नंगर पंचायत की लापरवाही ने ली एक जान, ठंड से मौत के बाद भी जिम्मेदार बेखबर नंगर। शहीद स्थल पर सत्यवान गिरी नामक व्यक्ति की ठंड से हुई मौत ने नंगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कड़ाके की ठंड और 7 डिग्री तक गिरे तापमान के बावजूद नगर पंचायत द्वारा अलाव की व्यवस्था न किए जाने से एक व्यक्ति को अपनी जान गंवानी पड़ी। यह मौत नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता से हुई हत्या मानी जा रही है। घटना के बाद समाज सेवियों ने मौके पर पहुंचकर मृतक के दाह संस्कार की तैयारी की, वहीं क्षेत्र में यह चर्चा आम रही कि यदि समय रहते अलाव की व्यवस्था की गई होती तो यह दुखद घटना टाली जा सकती थी। समाज सेवी दीपक राय ने बताया कि मृतक ठंड से बुरी तरह कांप रहा था, जिसे बचाने के लिए उन्होंने अपनी ओर से दो कंबल दिए थे। लेकिन सवाल यह है कि जब एक आम समाजसेवी कंबल दे सकता है, तो नगर पंचायत अपनी जिम्मेदारी क्यों नहीं निभा पाई? स्थानीय लोगों का आरोप है कि नंगर पंचायत द्वारा अलाव की व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित है। जमीनी हकीकत यह है कि सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलते ही नहीं। इसी लापरवाही का खामियाजा सत्यवान गिरी को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता अशोक चौधरी ने नगर पंचायत अध्यक्षा पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि बड़े भरोसे और उम्मीदों के साथ पार्टी का परचम नंगर में लहराया गया था, लेकिन अध्यक्षा ने जनहित के कार्यों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने बताया कि कई बार आग्रह करने के बावजूद नंगर में अलाव की व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया, जिसका परिणाम आज सबके सामने है—एक व्यक्ति की मौत। वहीं प्रशांत पाल ने कहा कि जब तापमान 7 डिग्री तक गिर चुका है, तब अलाव जैसी बुनियादी सुविधा न देना सीधी प्रशासनिक लापरवाही है। राहगीर, यात्री और गरीब तबके के लोग रात में ठंड से बेहाल हैं, लेकिन नगर पंचायत के जिम्मेदारों को इसकी कोई चिंता नहीं। इस घटना ने नगर पंचायत की संवेदनशीलता पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है। सवाल यह है कि क्या इस मौत की जिम्मेदारी तय होगी या फिर हर बार की तरह यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा? जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जवाब और कार्रवाई चाहती है।