सिकरीगंज में जीवनदायिनी कुआनो नदी की दुर्दशा, कूड़े से पटी धारा पर

सिकरीगंज में जीवनदायिनी कुआनो नदी की दुर्दशा, कूड़े से पटी धारा पर उठे सवाल सिकरीगंज बांसगांव संदेश। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद के सिकरीगंज क्षेत्र से होकर बहने वाली कुआनो नदी आज अपनी पहचान बचाने के लिए जूझ रही है। यह मैदानी नदी उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के पूर्वी निचले इलाके के बसाउपुर गांव स्थित एक सोते/कुंड से निकलती है। बहराइच से प्रारंभ होकर यह गोंडा, बस्ती और संत कबीर नगर जनपदों से गुजरती हुई गोरखपुर में सरयू (घाघरा) नदी में मिल जाती है। कुआनो नदी सरयू की एक प्रमुख सहायक नदी के रूप में जानी जाती है। कभी साफ और स्वच्छ जल के लिए पहचानी जाने वाली यह नदी मानसून के समय बाढ़ के लिए भी जानी जाती रही है। सिकरीगंज और आसपास के ग्रामीण इलाकों के लिए यह नदी प्रमुख जलस्रोत है। इसी नदी का पानी आसपास के पशु-पक्षी पीते हैं और खेतों की सिंचाई भी इसी से होती है। लेकिन वर्तमान में नदी की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। स्थानीय लोग नदी में कूड़ा-करकट और अपशिष्ट फेंक रहे हैं, जिससे जल प्रदूषित हो रहा है। गंदगी के कारण नदी की प्राकृतिक सुंदरता और उपयोगिता दोनों प्रभावित हो रही हैं। यदि समय रहते सफाई और संरक्षण की ठोस पहल नहीं की गई तो आने वाले दिनों में यह जीवनदायिनी धारा केवल नाम मात्र की रह जाएगी।