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Balram Singh
Fatehpur२७ दिन पहले

मिलर्स के चावल से पूरी कर दी धान की खरीद, हाथ मलता रह गया किसान !

मिलर्स के चावल से पूरी कर दी धान की खरीद, हाथ मलता रह गया किसान !

मिलर्स के चावल से पूरी कर दी धान की खरीद, हाथ मलता रह गया किसान ! किसानों के धान केंद्रों में पड़े, खरीद बंद होने से किसान नाराज कागज़ों में पूरी खरीद दिखाकर डाल दिया केंद्रों में ताला ! फतेहपुर । जनपद में सरकारी धान खरीद एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिले में एक लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य भले ही कागज़ों में पूरा दिखा दिया गया हो, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। आरोप है कि यहां असली धान की जगह बाहर से आए ‘चावल’ को धान बताकर सरकारी खरीद दिखा दी गई, जबकि स्थानीय किसान आज भी अपना धान लेकर खरीद केंद्रों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। बता दें कि असोथर हाट शाखा विपणन केंद्र का हाल सबसे ज्यादा चौंकाने वाला है। यहां करीब 40 से 50 किसानों का धान तौल के इंतजार में पड़ा हुआ है, लेकिन 19 जनवरी से तौल पूरी तरह बंद है। खरीद केंद्र के गेटों में ताले लटके हैं और किसानों को सिर्फ आश्वासन दिए जा रहे हैं। शासन द्वारा छह कांटे उपलब्ध कराए जाने के बावजूद वास्तविक खरीद न के बराबर हुई है। सूत्रों का दावा है कि व्यापारियों और मिलर्स की मिलीभगत से बिहार और बंगाल से लाए गए चावल को कागज़ों में ‘धान’ दिखाकर खरीद दर्ज कर ली गई। इसी कागज़ी खेल के जरिए जिले का लक्ष्य पूरा कर लिया गया, जबकि स्थानीय किसान इस पूरी व्यवस्था से बाहर हो गया। नैफेड, एफसीआई, पीसीएफ, यूपीसीयू और हाट शाखा विपणन केंद्रों पर भी कागज़ी खरीद के आरोप सामने आ रहे हैं। धान न बिक पाने से परेशान किसान अब मजबूरी में बिचौलियों और व्यापारियों को समर्थन मूल्य से काफी कम दामों पर अपनी उपज बेच रहे हैं। किसानों का कहना है कि सरकार की समर्थन मूल्य नीति उनके लिए सिर्फ फाइलों और आंकड़ों तक सिमट कर रह गई है। खेत में मेहनत किसान की, लेकिन फायदा दूसरों को मिल रहा है। इस बाबत असोथर हाट शाखा में खरीद केंद्र प्रभारी शेखर मौर्य, ललित यादव, अखिलेश यादव और रामदयाल तिवारी का कहना है कि शासन स्तर पर तौल का लक्ष्य पूरा हो जाने के कारण धान खरीद बंद कर दी गई है। जैसे ही नया लक्ष्य मिलेगा, केंद्र में पड़े धान की तौल शुरू कर दी जाएगी। वहीं जिले के कार्यवाहक डिप्टी आरएमओ समीर कुमार शुक्ला ने बताया कि शासन को लक्ष्य बढ़ाने के लिए पत्र भेजा गया है और जल्द ही स्वीकृति मिलने की उम्मीद है।

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