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Krishna Prakash Pandey
Gorakhpur१२ मिनट पहले

सामाजिक सौहार्द बुराई के अंत का प्रतीक है होली

सामाजिक सौहार्द बुराई के अंत का प्रतीक है होली

सिकरीगंज बांसगांव संदेश। सिकरीगंज कस्बे में स्थित श्याम स्वीट हाउस के सामने हर साल की भात इस साल भी पूरे भक्ति भाव व पूजा अर्चना के साथ होली के 3 दिन पहले गाड़ा गया सम्मत। रामप्रवेश कसौधन ने कहा होली मुख्य रूप से बुराई पर अच्छाई की विजय (भक्त प्रहलाद की रक्षा), भगवान विष्णु की भक्ति, और वसंत ऋतु के आगमन के उपलक्ष्य में मनाई जाती है होली। यह पर्व पौराणिक कथाओं के अनुसार होलिका दहन के अगले दिन फाल्गुन पूर्णिमा को रंगों के साथ मनाया जाता है, जो सामाजिक सौहार्द और नई फसल की खुशी का प्रतीक है। अशोक कसौधन ने कहा हिरण्यकशिपु ने भगवान विष्णु के भक्त अपने ही पुत्र प्रहलाद को मारने के लिए अपनी बहन होलिका (जिसे आग में न जलने का वरदान था) की गोद में बिठाकर आग में डाल दिया था। भगवान विष्णु की कृपा से प्रहलाद बच गए और होलिका जल गई। यह दिन बुराई के अंत का प्रतीक है। सजीव जायसवाल ने कहा राधा-कृष्ण का प्रेम: ब्रज में, यह त्यौहार राधा और कृष्ण के पवित्र प्रेम और रंगों के मिलन का उत्सव है, जो एक-दूसरे पर रंग लगाकर राधा-कृष्ण के प्रति सम्मान प्रकट करते हैं। शिवम गुप्ता ने कहा वसंत ऋतु का आगमन (फसल का त्यौहार): यह त्यौहार ऋतु परिवर्तन का संकेत है और किसानों के लिए नई फसल (रबी की फसल) कटने की खुशी में मनाया जाता है। प्रदीप कसौधन ने कहा कामदेव का पुनर्जन्म: पौराणिक कथा के अनुसार, महादेव द्वारा भस्म किए गए कामदेव को शिवजी ने रति की प्रार्थना पर पुनर्जीवन का वरदान दिया था, जिसे वसंत ऋतु में उत्सव के रूप में मनाया जाता है। मौके पर मोहित जायसवाल, अरविंद उर्फ कल्लू, सोनू कसौधन, एडवोकेट रवि गुप्ता आदि लोगों उपस्थित रहे।

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